श्री चन्द्र सैन वो हस्ती थे , जो रुके नहीं , थके नहीं !
विपदाओं में झुके नहीं , सुविधाओं में बिके नहीं !!
राष्ट्र प्रेम का संस्कार था , संघ की शाखा से पाया!
वह दीप जला मन में ऐसा , जो आजन्म नहीं बुझने पाया ! - हनुमान प्रसाद ' अग्निमुख '
विपदाओं में झुके नहीं , सुविधाओं में बिके नहीं !!
राष्ट्र प्रेम का संस्कार था , संघ की शाखा से पाया!
वह दीप जला मन में ऐसा , जो आजन्म नहीं बुझने पाया ! - हनुमान प्रसाद ' अग्निमुख '
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