गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

सुरेन्द्र गुप्ता , 122 , वैशाली , पीतमपुरा, दिल्ली

पिता का स्थान जीवन में करीब करीब परमात्मा सरोखा है ! हमारे माँ - बाप ही हमारे शारीरिक, सामाजिक व  आध्यात्मिक जीवन के सूत्रधार  है ! प्रिय राजेश जी आज आपके परिवार से वो सदस्य चले गये है ! जिनसे आपका साथ , जब से आपने इस दुनिया में आखें  खोली, तबसे था ! एक छाया एक आशियाने की तरह पल पल पर याद आते रहेंगे सारी जिंदगी ! उनकी याद उनकी अमूल्य धरोहर है !-  आपका शुभेच्छु  सुरेन्द्र गुप्ता 

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