भाई मनोज जी , राजेश जी, परमपूज्य पिता जी का स्वभाव बड़ा निर्मल , कोमल, पल में बड़े लोगों में सहायक, बच्चों में बच्चों जैसे कोमल मन बनाकर बातें करना कोई इनसे सीखो ! ऐसा था हमारे मौसा जी का स्वभाव ! मुझे उनकी कमी बहुत खलेगी , क्योँकि उनके मिलने पर वही मुझे प्यार से आओं मेरे ' पाण्डू ' जी कहकर पुकारते थे ! आज मेरा मन दुःख इभी है , साथ में प्रेरणामयी यादें सदा उनकी का एहसास कराती रहेंगी ! भगवान से उनकी स्वर्ग में वास की कामना करता हूँ ! - बलबीर बंचल अधिवक्ता
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