वक्त हुआ दीवारों पर तहरीर , हँसते - गाते लोग हुए तस्वीर ,
अम्मा है जैसे इस घर की नींव बाबूजी थे ज्यों छत के शहतीर - श्रद्देय बाबूजी को श्रधासुमन ! - मंगल नसीम
अम्मा है जैसे इस घर की नींव बाबूजी थे ज्यों छत के शहतीर - श्रद्देय बाबूजी को श्रधासुमन ! - मंगल नसीम
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