मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

डा . सुनील खेतरपाल - शालीमार बाग , दिल्ली

माँ की तरह बाप की बापता तोह नहीं होती लेकिन पुत्र की पहचान बाप के नाम से ही होती है ! क्षण में एक स्वछंद प्राणी होते हुए घर का पूर्ण दायित्व संभालना पड़ता है ! प्रभु उस दायित्व को सहने की क्षमता दें ! पुष्प आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें ! - डा . सुनील खेतरपाल 

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