गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

मधु मोहिनी उपाध्याय

श्री राजेश  जैन  "चेतन"  जी  के पिता के  दिवगंत होने की  सूचना  से व्यथित हूँ ! पिता की क्षति  अपूरणीय हैं ! मैं चेतन जी के परिवार के साथ इन दु : खद क्षणों  में हूँ ! ईश्वर दिवगंत आत्मा को शांति प्रदान करे !
सुन्दर आकृति क्षण भर में होती विकृति ,
                         फिर रूप का क्या गर्व है!
                                             मृत्यु ही अंतिम पर्व है !
इस पर्व को सोल्लास मनाये , जिससे स्व . पिताजी प्रसन्न हो कृपा दृष्टि कर आशीष दें !
_    मधु मोहिनी उपाध्याय 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें