सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

सुरेन्द्र शर्मा

मेरी संवेदनायें परिवार के साथ है ! पिता की मृत्यु से घर में इतना अंतर आ जाता है कि बेटे जो फर्श की तरह पिता के रहते थे, उन्हें एक झटके में छत बनना पड़ता है! आप दोनों इस स्थिति में हो कि छत  होने की जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकते हो ! मुझे इस दुःख  में सहयोगी समझे ! - सुरेन्द्र  शर्मा 

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