श्री राजेश चेतन जी के पिताजी का देहांत एक दुर्भाग्यपूर्ण बात है ! जीवन में पिता की एक एहम भूमिका है !
पिता तुम वृक्ष छायादार,
धूप से हमको बचाकर,
सह रहे खुद मार ,
पिता तुम वृक्ष छायादार - काली शंकर
पिता तुम वृक्ष छायादार,
धूप से हमको बचाकर,
सह रहे खुद मार ,
पिता तुम वृक्ष छायादार - काली शंकर
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