तीन साल पहले आदरणीय राजेश जी को एक कवि के रूप में जानने का मौका मिला , लेकिन वक्त के साथ राजेश जी के व्यक्तित्व की कई परतें खुलती गई और महसूस हुआ कि कोई व्यक्ति बिना संस्कारों की निधि के इतना धनी नहीं हो सकता ! दुर्भाग्यवश संस्कारों का वह सूरज इस जहान से अस्त होकर किसी दूसरी यात्रा पर निकल गया , लेकिन राजेश चेतन के रूप में पीछे एक किरण पुंज , एक ऐसा दीप जो कल निश्चित ही सूर्य की तरह प्रकाशमान होगा ! दिवगंत बाबूजी की आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करें तथा परिवार को सुख समर्धि ! - चरण जीत
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