पूज्य चन्द्रसैन जैन जी की मृत्यु से ह्रदय को आघात लगा, परन्तु उनके व्यावाहारिक जीवन का जो मर्दानापन था , वह किसी भी संकट से जूझने में सक्षम है ! उनका जीवन जितना उदक्त था , उनका ह्रदय उसी अनुपात में कोमल था ! उनके जीवन का संस्कार उनकी संतान में स्वत : दिखाई देता है ! जहाँ उनका जीवन कठोर हृदयों के लिए कठोर था , उतना ही मजदूरों के लिए समर्पित ! उनके जीवन से खूब सीखा जा सकता है ! मेरी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि ! - जगत नारायण भारद्वाज - भिवानी
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