प्रिय राजेश , आपके पिताश्री में मैंने अपने पिताश्री की छाया देखी है ! मैनें भी वह दुःख महसूस किया है जो आज आप व आपका समस्त परिवार कर रहा है ! इस अपार दुःख से आप अवश्य पार हो जायेंगे क्योंकि आपके पिताश्री ने अपने यशस्वी पुत्र को अपनी आँखों के सामने अपने आदर्शों पर चलते देखा ! इससे बढकर उनके लिए क्या ख़ुशी रही होगी ! परम धर्म को जानना सत्य है , अत : यह जानकर आप धैर्यपूर्वक इस दुःख को सहन करेंगे ! मैं आपके दुःख व सुख में सदैव साथ हूँ ! प्रभु उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें ! आपका अपना - महेन्द्र शर्मा - ( कवि पत्रकार )
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