पिताजी
बुधवार, 27 फ़रवरी 2013
नरेश जैन - अनिल जैन - देशबंधु गुप्ता रोड
आदरणीय भाई साहब, हमारे गाँव के अभिनय मित्र थे ! मृत्यु अनित्य है ! ऐसी अमिट छाप छोड़ जाती है जो समाज व धर्म के प्रति निष्टावान होती है और अपने कार्य के प्रति सदा सवदा रहती है ! सदा सवदा रह के अपने जीवन अमर को अमर बना देती है ! - नरेश जैन - अनिल जैन
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